15 January, 2009




मनुष्य़ जब चाँद पर जायेगा
मनुष्य चाँद पर रहने जयेगा ?
धरती को सहेज पाया नहीं
चाँद पर क्या गुल खिलायेगा
ऐसा नहीं कि मुझे चाँद से
इश्क नही
मगर सच कहने में भी
हिचक नहीं कि
जब मनुष्य चाँद पर
नयी दुनिया आबाद करेगा
तब इसं अंधी दौड मे
धरती को बर्बाद करेगा
नंगे भूखों की सीढी बना
उनके पैसों स राकेट् बना
चाँद पर चढ जायेगा
उनके घर की इँटों से
अपना महल बनायेगा
फिर दुनिआ भर के बैंक
चाँद पर ले जायेगा
दो नम्बर का सारा पैसा
वहीं जमा करवायेगा
चाँद का टिकेट मिलेगा
नेताजी या सरमायेदारों को
खबरिया चैनल वालों का
वीज़ा जब्त हो जायेगा
आमआदमी चाँद से फैंकी
बासी रोटी खायेगा
विवाह शादी के मसले पर
ऐसे कानून बनायेगा
बीवी रहेगी धरती पर
प्रेमिका चाँद पर ले जायेगा
मनुष्य जब चाँद पर जायेगा !!


11 comments:

हिमांशु said...

बड़ी खूबसूरत अभिव्यक्ति.

क्या सच में ऐसा होगा-
"बीवी रहेगी धरती पर
प्रेमिका चाँद पर ले जायेगा"

manvinder bhimber said...

आमआदमी चाँद से फैंकी
बासी रोटी खायेगा
विवाह शादी के मसले पर
ऐसे कानून बनायेगा
बीवी रहेगी धरती पर
प्रेमिका चाँद पर ले जायेगा
मनुष्य जब चाँद पर जायेगा
bhaawpurn or सुंदर लिखने बधाई

Arvind Mishra said...

सच कहा !

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर ! और तो जो करेगा, परन्तु चाँद पर भी वह गंदगी अवश्य फैलाएगा। जब वह भी रहने लायक नहीं रह जाएगा तो फिर कहीं और जाएगा।
घुघूती बासूती

प्रवीण जाखड़ said...

bahut shandar! tab hum bhi chand par chale jayenge, aakhir blog waale kaunse pichhe rehne waale hain.

BrijmohanShrivastava said...

बहुत जबरजस्त व्यंग्य / आम आदमी का चाँद से फेंकी रोटी खाना ,पत्नी का धरती पर ही रह जाना/सारे बैंक चाँद पर चले जाना (हाय राम मेरी पेंसन का क्या होगा ) नंगे भून्खों को सीड़ी बना कर उनके पैसो से रॉकेट खरीदना / व्यंग्य भी ,समाज के कमजोर दुखी लोगों के प्रति सहानुभूति भी ,धन का अपव्यय भी सारी बातें एक ही रचना में समेट दीं इसे कहते हैं साहित्य सृजन

Er. Snigddha Aggarwal said...

सुंदर रचना, एक सफल प्रयास सुंदर ब्लॉग
धनयवाद

अविनाश said...

खबरिया चैनल वालों का
वीज़ा जब्त हो जायेगा
आमआदमी चाँद से फैंकी
बासी रोटी खायेगा
विवाह शादी के मसले पर
ऐसे कानून बनायेगा
बीवी रहेगी धरती पर
प्रेमिका चाँद पर ले जायेगा
मनुष्य जब चाँद पर जायेगा

Kavi Kulwant said...

Nice!

Tapashwani Anand said...

bahut hi sundar.......


dekh najakat mauke ki chup rahna bahut jaroori hai.
aur sahi waqt par sahi baat bhi kahna bahut jaroori hai.

Atul Sharma said...

आप तो लोगों को घर बसाने/बनाने/बिगाडने का एकदम नया आइडिया पेश कर रहीं हैं ।

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