03 August, 2018

 गज़ल

रहे बरकत बुज़ुर्गों से घरों की
हिफाजत तो करो इन बरगदों की

खड़ेगा सच भरे बाजार में अब
नहीं परवाह उसको पत्थरों की

रहे चुप हुस्न के बढ़ते गुमां पर
रही साजिश ये कैसी आइनों की

ये  दिल के दर्द है जागीर मेरी
भरी संदूकची उन हासिलों की

मुहब्बत में मिले दुःख दर्द जो भी ।
भरी झोली सभी उन हासिलों की

न चोरों की हो'सरदारी अगर तो
बचे पाकीज़गी इन कुर्सियों की

न हम खोते कभी ईमान अपना
भले होली जले कुछ ख्वाहिशों की

10 comments:

Kavita Rawat said...

दृढ़ इच्छाशक्ति वालों के कदम किसी भी स्थिति भी नहीं डगमगाते हैं
बहुत सुन्दर गजल

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, चैन पाने का तरीका - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Digamber Naswa said...

बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल ...
हर शेर सटीक और खरी बात कहता हुआ ...

pushpendra singh said...

बड़ी अच्छी गजल हे. आप अपने ब्लाग सुधार के लिए मुझ से सम्पर्क कर सकते हे.pushpendrask555@gmail.com

Ashi said...

Ati sundar.

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Sandeep Yadav said...

बहुत सुन्दर गजल Very Good

Internet Day said...

बहुत अच्छा
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Internet Day said...


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Puran Mal Meena said...

बहुत सुन्दर गजल Jio Mobile फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट कैसे करें

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