17 January, 2009


आज महफिल में सुनने सुनाने आयेंगे लोग
समाज के चेहरे से नकाब ऊठाने आएंगे लोग
बीते जमाने के सब लगते हैं अफसाने
नये जमाने की हकीकत बताने आयेंगे लोग
किसी की मौत पे रोना गुजरे दिनों की बात है
अब दिखावे को मातम मनाने आयेंगे लोग
घर की आग से धुआं उठने ना देना कभी
नहींतो आग को हवा दिखाने आयेंगे लोग
डर के भागना बुजदिली है दोस्तो
जितना डरोगे उतना डराने आयेंगे लोग
सच बोलना है तो हिम्मत से काम लेना
जख्मी सांप की तरह बल दिखाने आयेंगे लोग
कौन किसी की आंख से आंसू पोंछना चाहे
किसी का दुख देख अपना दिल परचाने आयेंगे लोग
दोस्ती के नकाब में छुपे हैं आज दुश्मन
पहले जख्म देंगे फिर सहलाने आयंगे लोग
जिन नेताओं को देते हैं गालियां
अन के बुत पर फूल चढाने आयेंगे लोग
जीते जी मां-बाप को रूखी रोटी न दें
पुर्खों के नाम पे पंडितों को खीर खिलाने आएंगे लोग् !!


14 comments:

Richa Joshi said...

अच्‍छी रचना। सही कहा है कि जितना डरोगे उतना डराने आएंगे लोग।

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

aap ne bilkul thick likha hai,sahi baat hai .

P.N. Subramanian said...

किसी भी एक पंक्ति को उद्धृत करने में हम असमर्थ हैं. एक पर एक सवा सेर हैं. आभार.

"अर्श" said...

घर की आग से धुआं उठने ना देना कभी
नहींतो आग को हवा दिखाने आयेंगे लोग

bahot hi umda likha hai aapne,behad prabhav shali..khasa pasand aai ye gazal aapki..dhero badhai kubul karen.

meri nai gazal jarur padhen..


regards
arsh

Udan Tashtari said...

घर की आग से धुआं उठने ना देना कभी
नहींतो आग को हवा दिखाने आयेंगे लोग

-बहुत गजब!! वाह!!

dwij said...

bahut khoob.

sundar rachanaa ke liye badhaaee.

ek se baDh kar ek khayaal.

संगीता पुरी said...

बहुत सटीक बातें....बहुत सुंदर रचना ।

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सुंदर शब्दों से सजी गहरे भावों से भरी आपकी ग़ज़ल लाज़बाब है

रंजना [रंजू भाटिया] said...

कौन किसी की आंख से आंसू पोंछना चाहे
किसी का दुख देख अपना दिल परचाने आयेंगे लोग

बिल्कुल सही बहुत खूब कहा आपने ..बहुत सुंदर लगे इस के भाव

JHAROKHA said...

Respected Nirmala ji,
Bahut hee sundar aur joshpoorna gazal likhi hai apne.
dar ke bhagna bujdili hai doston
jitna daroge utna darane ayenge log...bahut sach..yatharth.badhai.
Poonam

MUFLIS said...

"kisi ki maut pe rona guzre dino ki baat hai, ab dikhave ko maatam mnane ayenge log..."
bahut khoob...!
bahot hi sachchi baateiN aur utna hi sachcha izhaar...
badhaaee !!
---MUFLIS---

अल्पना वर्मा said...

घर की आग से धुआं उठने ना देना कभी
नहींतो आग को हवा दिखाने आयेंगे लोग
bahut hi sundar kavita hai.
vastvikta ka vikrt pahlu dikahti hui..shbdon se sateek chitran kiya gaya hai.

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah..wa
BADHAI

अक्षय-मन said...

अरे ! ये तो बहुत ही अच्छी रचना है वाकई सच्चाई को रूप दे दिया इन शब्दों ने बहुत ही अच्छे विचार हैं...

अक्षय-मन

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