30 December, 2008



रोज सोचा करते थे
वो सब के दोस्त?
मगर केसे?
अपनी ही किस्मत
क्यों धोखा खा गयी
जब गिरगिट को
देखा रंग बदलते
उनकी तरकीब
समझ आ गयी

11 comments:

mehek said...

kbahut khub

अक्षय-मन said...

जब गिरगिट को
देखा रंग बदलते
उनकी तरकीब
समझ आ गयी
हाहाहा बहुत ही सुंदर लिखा है बहुत ही अच्छा कम शब्द मैं बहुत ही सच्ची बात

अक्षय-मन

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

बहुत सुंदर,
कम शब्दों में भावों का जबरदस्त प्रस्तुतीकरण.
बधाई

सीमा सचदेव said...

नमस्कार निर्मला जी ,
आपकी छोटी सी कविता बहुत बडी बात कह गई |

मैने शायद पहले आपको देखा है ,आपकी तस्वीर देखकर ऐसा लगा था |
लेकिन जब आपका परिचय पढा तो ९०% यकीन हुआ ,देखा ही है | मै भी
आप ही के शहर से हूँ यानि नंगल | मेरे फादर इन लॉ भी बी.बी.एम.बी.
मे हैं |आप से मिलकर अच्छा लगा |
सादर
सीमा सचदेव

ilesh said...

beautyful....trifiest

विनय said...

नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

seema gupta said...

"नव वर्ष २००९ - आप सभी ब्लॉग परिवार और समस्त देश वासियों के परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "

regards

आकांक्षा***Akanksha said...

नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !! नव वर्ष-२००९ की ढेरों मुबारकवाद !!!...नव-वर्ष पर मेरे ब्लॉग "शब्द-शिखर" पर आपका स्वागत है !!!!

Amit said...

बहुत अच्छी कविता...नया साल आपको मुबारक हो....

Dev said...

First of All Wish U Very Happy New Year....

Jab girgit ko dekha rang badalte ....

Achchi rachana...
Badhi..

गजेन्द्र बिष्ट said...

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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