28 February, 2010

हज़ल

हज़ल
होली की आप सब को हार्दिक शुभकामनायें
आज कहानी की आखिरी किश्त  बीच मे रोक कर  अपने छोटे भाई पंकज सुबीर के आदेश पर ये हज़ल पेश कर रही हूँ आप जानते हैं कि रिटायरी कालोनी मे तो होली मनाई नही जाती, तो हमने सोचा कि  पंकज सुबीर के मुशायरे मे चलते हैं लेकिन वहाँ जा कर क्या हाल हुया ये आप सब देख लें । इस भाई ने तो मुझे वो जूते पडवाये कि बस पूछो न। लेने के देने पड गये । कहते कि हज़ल लिखो बाप रे इतनी मुश्किल बहर दे दी मगर हम भी कहाँ कम थे---दे तडा तड वो जूते बरसाये कि होली का आनन्द आ गया हमे कहा कि खूब गोबर जूतों का इस्तेमाल करो। तो आप देखिये कैसे खेली हम ने होली।  पहली बार हज़ल लिखी है बुरा न मानो होली है। मिसरा था-----

उतारो जूतों से आरती अब सनम जी आये गली हमारी
छोटे भाई  ने पता नही किस जन्म का बदला लिया। पतिदेव ने पढ कर हमारे जूते से ही हमारी होली मना दी--- हा हा हा।और सब से बडी खुशखबरी कि उन्हें  उनके उपन्यास  पर नवलेखन ग्यान पीठ पुरुस्कार मिला है जिस के लिये उन्हें बहुत बहुत बधाई।
हज़ल
बहार ले कर है आयी होली खुशी मनाये गली हमारी
उतारो जूते से आर्ती अब सजन हैं आये गली हमारी

सखी ले आना तगारी गोबर गुलाल ले कर उसे सजाना
करो सुवागत जु शान से वो ठहर न पाये गली हमारी

अबीर कीचड मिला बनायें जरा सा उबटन लगे सजीला
खिलाऊं घी गुड चुरी उसे जो पकड के लाये गली हमारी

बना सखी  हार चप्पलों से सडे टमाटर पिरोना उपले
है चाहता तो गधे पे चढ कर चला वो आये गली हमारी

निगाह उसकी मुझे है ढँढे मै बचती छुप छुप सखी के पीछे
बने वो छैला कहे है लैला मुझे सताये गली हमारी

करूँ विनय लो न भाँग धतूरा अभी है मेरी नज़र शराबी
सजी धजी सजनी ले के डंडा तुझे बुलाये गली हमारी

बहुत सताया मुझे है पर अब मै गिन के बदले करूँगी पूरे
बुरा न मानो शुगल करें जो होली मनाये गली हमारी

मुझे सताये बना बहाने बता भला ये उमर है कोई
चखाऊँ उसको बना के भुर्ता मजे से खाये गली हमारी

हैं दाँद नकली चढा है चश्मा झुकी कमर है बने जवाँ वो
ले धूल मिर्ची बुरक उसे जो ये छब बनाये गली हमारी

करो पिटाई करो ठुकाई बुढू को देखो बना मजाजी
मजा चखाऊँ उसे बताऊँ कभी जु आये गली हमारी

निरा ही लम्पट न शक्ल सूरत मलो तो चून औ चाक मुँह पर
बना के जोकर नमूना उसको उठा दिखाये  गली हमारी

ये ब्लाग दुनिया हुयी चकाचक बिखर रही है खुशी जहाँ मे
सुबीर लाये रंगीन होली हसे हसाये गली हमारी

सजे ये होली सजें नशिश्तें सभी तरफ हो खुशी मुहब्बत
मुबारकें है सलाम भी है यूँ खिलखिलाये गली हमारी।

45 comments:

Mithilesh dubey said...

माँ जी पढ़ तो पूरा लिया अच्छा भी लगा परन्तु समझ कम ही आया , आपको होली की बहुत -बहुत बधाई ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

होली पर ढेरों शुभकामनाएँ!!!

दीपक 'मशाल' said...

Maasi ji maaf karna abhi padh nahin raha warna agar maine bhi gazal likhi to is wali gazal ka effect aa jayega uspar.. main bhi koshish karta hoon tarhee par likhne ki..
इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
(और आज पहली बार ब्लॉग पर बुला रहा हूँ.. शायद आपकी भी टांग खींची हो मैंने होली में..)

होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...

M VERMA said...

what a scene
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

श्यामल सुमन said...

भंग खाकर टुन्न होकर पढ़ रहा था ये हजल।
दिल में चाहत प्यार से भर जाये गली हमारी।।

होली की शुभकामना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

योगेश स्वप्न said...

wah wah bahut khoob kapila ji, bahut khoob likha hai.....holi ki shubhkaamnayen.

अल्पना वर्मा said...

वाह! वाह! होलिया हज़ल!!

****आपको सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये****

'अदा' said...

waah waah bahut khoob..
aapko aur aapke samasth pariwaar ko holi ki shubhkaamna..!!

अमिताभ मीत said...

बढ़िया हज़ल .....

होली की हार्दिक शुभकामनाएं !!

Apanatva said...

Badhai aur shubhkamnae.
hasee majak ka mahoul ye jeevan bhar bana rahe ye hee shubh kamna hai.........

डॉ. मनोज मिश्र said...

अबीर कीचड मिला बनायें जरा सा उबटन लगे सजीला
खिलाऊं घी गुड चुरी उसे जो पकड के लाये गली हमारी

बना सखी हार चप्पलों से सडे टमाटर पिरोना उपले
है चाहता तो गधे पे चढ कर चला वो आये गली हमारी
VAAH,होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

जी.के. अवधिया said...

आप तथा सभी ब्लॉगर मित्रों को होली की शुभकामनाएँ!

sangeeta swarup said...

ये हज़ल भी खूब है.....

होली की शुभकामनायें..

शारदा अरोरा said...

सुन्दर लिखा है , होली की बहुत बहुत बधाई | बुडू को बुढऊ कर लें |होली के रंग में सब माफ़ है |

शारदा अरोरा

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

hpy holi ji..

सुलभ § सतरंगी said...

यकीन मानिए, ये एक बेहतरीन हज़ल है. होली पर आपने भी खूब रंग बरसाए हैं.
आपको सपरिवार होली की बधाई.

अजय कुमार said...

आपको तथा आपके समस्त परिजनों को होली की सतरंगी बधाई

Kusum Thakur said...

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई !!

Kusum Thakur said...
This comment has been removed by the author.
वन्दना said...

holi ke rang hi rang bikhre huye hain..........happy holi.

राज भाटिय़ा said...

आप और आप के परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं !!
पहले तो सोचा चलो आप को मेल कर के बता दुं कि आप ने गजल की जगह हजल लिख दिया.... लेकिन जब आगे पढा तो लगा आप ने हजल ही लिखी है, ऒर हजल भी होली के रंग मै ओर भांग के नशे मै रची हुयी, वेसे भांग तो पंजाब मै बहुत होती है, लेकिन मेने कभी चखी नही, बहुत सुंदर लगी आप की यह हजल ओर नशा भी हो गया हमे जुतो का खाये बिना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

होली की रंगभरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

नीरज गोस्वामी said...

निर्मला जी ये हज़ल आपकी जिंदादिली का जीता जागता सबूत है...आनंद आ गया...वाह...होली की एक बार फिर से ढेरों शुभकामनाएं...
नीरज

अनामिका की सदाये...... said...

yeh bhi khoob rahi .....wish u happy holi.

Babli said...

आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बहुत सुंदर.

पवन *चंदन* said...

भल्‍ले गुझिया पापड़ी खूब उड़ाओ माल
खा खा कर हाथी बनो मोटी हो जाए खाल
फिरो मजे से बेफिक्री से होली में,
मंहगाई में कौन लगाए चौदह किला गुलाल
http://chokhat.blogspot.com/

Amitraghat said...

"हैप्पी होली......."
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

*n*i*l*i*m*a* said...

aaj pehli baar aap ke blog par ayi aur aate hi Hazal ne sarabor kar diya...
Happy Holi..
aap jo lekhan ke rang mei doobi hai aap ka har din holi hi to hai..

With Love
nilima Dogra

Mumukshh Ki Rachanain said...

मज़ा आ गया .............
हज़ल पर भी
होली की इस प्रस्तुति पर भी.

होली पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं........

चन्द्र मोहन गुप्त

प्रकाश पाखी said...

आदरणीय निर्मला दी,
सबसे पहले आपको और आदरणीय जीजाजी ko होली के सदर चरण स्पर्श!
आपकी हजल पढ़कर तो गुरुदेव के ब्लॉग पर भी खूब मजा आया था.अब इस पर हम क्या कहें?

आपने तो भंग के नशे में जीजाजी को क्या क्या कह डाला...बड़े नाराज हुए है..अब उनको मनाने के लिए मैं आता हूँ..पंजाब!..जब बड़े गलतियाँ करते है तो छोटों को बीच बचाव करना ही पड़ता है...एक तो उनको गल्त फेहमी आपके उस शेर से हुई जिसमे आपने अपनी नजर के शराबी होने को बताया...गजल गुजल से ज्यादा समझते नहीं है न..मैंने फोन पर बात की तो गुस्से में फट कर बोले ..त्वाडी भैन तो मेनू शाराबी केंदी ..जी..!
मैंने उन्हें समझाया -अजी कोई गल नि..जीजाजी..भंग दे नशे में पता थोड़ी न चलता है ...और एडी बात फोन विच नहीं न करते ..मेनू त्वाडे घर आण दो जी ...शाम को पेग शेग लगाएंगे...फिर बात करेंगे.

फिर मैंने जीजाजी के आगे आपकी तारीफ़ भी की--

मैंने कहा हजल का मक्ता सुनो जीजाजी ,

सजे ये होली सजे नशिश्ते,सभी तरफ हो ख़ुशी मोहब्बत
मुबारकें हैं सलाम भी है,यूँ खिलखिलाए गली हमारी

कितना सुनदर लिखा है इससे तो विशवास ही नहीं होता कि दीदी ने आपको नकली दांत,चढ़ा के चश्मा,झुकी कमर,और मजा चखाने और पिटाई ठुकाई की बातें भंग के नशे में लिखी है.
मैंने सही कहा ना!

होली की ढेरों शुभकानाए!
प्रकाश पाखी

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत मजा आया इस हजल में.

आपको दिपावली की घणी रामराम.

रामराम.

शरद कोकास said...

हज़ल अब लुप्तप्राय विधा होती जा रही है उसे यहाँ जीवित देखकर अछ्छा लगा । रंगपर्व की शुभकामनायें ।

Udan Tashtari said...

पुनः पढ़कर प्रमुदित हुए. :)


ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

सतीश सक्सेना said...

देखने आया हूँ मेम ! वाकई मज़ा आगया और विश्वास हुआ !
आप दोनों के लिए शुभकामनायें !

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" said...

आपको सपरिवार होली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएँ

डॉ टी एस दराल said...

बहुत बढ़िया निर्मला जी । आनंद आ गया ।
आपको और आपके समस्त परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनयें।

Rekhaa Prahalad said...

आपको भी सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!

दिगम्बर नासवा said...

VAAH .. VAAH .. BAHUT KHOOB .. IS HAZAL KA ANDAAZ LAJAWAAB HAI ...
AAPKO HOLI KI BAHUT BAHUT SHUBH-KAAMNAAYEN ...

रचना दीक्षित said...

एक नए अंदाज़ की पोस्ट
एक दम मस्त मजेदार ह....हा ..हा बहुत लाजवाब, बहुत कुछ कह डाला इतने में ही आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें

AKHRAN DA VANZARA said...

aapka ek alag hee andaaz dekhne....... sorry...... padhne ko mila ....
badhaai evm shubhkaamnaaeyn

AKHRAN DA VANZARA said...
This comment has been removed by the author.
manu said...

हज़ल में मजा आ गया जी..
मुश्किल बह्र को आपने काफी हद तक निभा डाला है..
बह्र के अनुरूप हिचकोले लेते पढ़ रहे हैं ये हज़ल..

Kulwant Happy said...

शब्दों की होली...खूब रंगा है हज़ल से...पंकज सुबीर का शुक्रिया..जिन्होंने आपको निवेदन किया।

पोस्ट ई मेल से प्रप्त करें}

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner