08 March, 2010

कविता--व्यंग महिला दिवस

दो दिन दिल्ली गयी थी इस लिये किसी ब्लाग पर नही आ सकी और न ही कुछ नया लिख सकी। फिर भी महिला दिवस हो तो सोचा कुछ तो लिखना ही चाहिये। इस लिये एक पुरानी कविता ठेळ रही हूँ। कल दिल्ली मे रंजू भाटिया जी और बेटे प्रकाश सिंह अर्श से मिली बहुत अच्छा लगा। मिलना तो बहुत से लोगों से चाहती थी मगर समय की कमी से मिल नही पाई। रंजू जी और अर्श का धन्यवाद अर्श तो गाज़ियाबाद से मुझे मिलने के लिये आया। अभोभूत हूँ।
अन्तर्राष्टिय महिला दिवस
(व्यंग कविता)

आज महिला दिवस उस पर ये छुट्टी
हमने भी इसे मनाने की हठ कर ली
सोच लिया कि अपना अधिकार जताना है
हमे महिला मीटिंग मे जाना है
सुबह उठते ही हमने किया ऎलान्
हमारे तेवर देख कर पती थे हैरान
आज गर्व से अपना चेहरा था तमतमाया
उस पर महिला दिवस का था रंग छाया
पती से कहा उँची आवाज़ मे
आज से हम महिला मीटिंग मे जायँगे
एक सप्ताह तक आप घर चलायेंगे।
आज का विषेश दिन हम अपनी
आज़ादी से शुरु करते हैं
आप सम्भालो घर की चारदिवारी
हम महिला मीटिंग मे चलते हैं
तुम बच्चों को खिला पिला कर
स्कूल पहुँचा देना
घर के काम काज से निपट
माँ की टाँग दबा देना
बर्तन चौका सब निपटाना समय पर
हम रात को देर से लौटेंगे घर
बस फिर हफ्ता भर हमने
पती को खूब नचाया
महिलायों के जीवन का
वास्तविक दृ्ष्य दिखलाया
हमने अपन अधिकार दिखा
कर धूम मचा दी
सदियों से चली आ रही
पती प्रथा की नींव हिला दी
तब सोचा ना था कि
ये महिला दिवस
इतना रंग लायेगा
कि अपने घर का
इतिहास बदल जायेगा

40 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हास्य तो बढ़िया था, लेकिन बहुत कठिन है महिला की जिन्दगी.

Amitraghat said...

"बढ़िया रचना है........"
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

dev said...

bahut Khoob...... Badhaai

Jo jindgii deti hai usi kay liye aarakshan??? Kaisee vidambnaa hai..

महफूज़ अली said...

मम्मा....यह व्यंग बहुत अच्छा लगा.....आपको नारी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ...........

Shefali Pande said...

badhiya vyangya hai nirmala ji....badhaai

Sonal Rastogi said...

हा हा हा बहुत सुन्दर ,निर्मला जी ऐसा ही कुछ स्वप्न देख रही थी करवट ली और बिस्तर से गिर पड़ी छुट्टी तो लेनी पड़ी ,एक पंथ दो काज हो गया ....

Apanatva said...

maza aa gaya.........are bhai hamara ghar hamare panap rahe rishte hee hamaree pahichan hai.........:)

rashmi ravija said...

हा हा ...क्या कविता है...काश एक हफ्ते के लिए नहीं...एक दिन के लिए ही सही हो जाए...बहुत बढ़िया व्यंग...

दीपक 'मशाल' said...

Maasi meri taraf se to 365 din hi mahilaon ke liye hone chahiye aap 1 din ya 1 hafte se kaise khush ho sakti hain.. :)
vyang thoda aur bada hota ya kuchh aur twist hoa to behtar banta.. jane kyon sapat sa laga meri samajh ko to.. maaf karna

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

kavaita to bahut achhi hai lekin aap se ek shikaayat hai..

aap delhi aayeen aur mujh se bina mile he chali gayeen...

mujhe agar pata hota to main bhi zarur aap se aashirwaad lene aata...

aahat hoon main :-(

Dr. Smt. ajit gupta said...

निर्मला जी, पहले तो आपके ब्‍लाग के नये कलेवर के लिए बधाई, बड़ा ही अच्‍छा लग रहा है। महिला-दिवस की कविता भी अच्‍छी है। बधाई।

वाणी गीत said...

कि घर का इतिहास बदल जायेगा .....!!

वाणी गीत said...

कि घर का इतिहास बदल जायेगा .....!!
मीठा व्यंग्य ...!!

दिगम्बर नासवा said...

अच्छा व्यंग है ... आशा है आपकी यात्रा सुखद रही होगी ...

arvind said...

हा हा हा बहुत सुन्दर ,अच्छा व्यंग है.आपको नारी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

shikha varshney said...

हा हा हा हा ..मेरा सुन्दर सपना टूट गया...................काश ऐसा हो जाये..बढ़िया व्यंग.

AKHRAN DA VANZARA said...

It is a gud satire ...
Congrats for the New Look of Your Blog...
Pls do read mine poem on Women's day if you get time ...
Thanx

--- Rakesh Verma

रंजना [रंजू भाटिया] said...

निर्मला जी आपसे मिलना बहुत अच्छा लगा .लगा ही नहीं की पहलीबार मिल रही हूँ ..बहुत सही व्यंग लिखा है आपने .ब्लॉग नए रूप में बहुत अच्छा लग रहा है ...

JHAROKHA said...

aadarniya nirmala ji,-bahut koob likha aapane to.
tab socha na tha ki ye mahila diwasitana rang jamayega ki ek din apane ghar ka iti haas badal jaayega.bahut aanand aaya padh kar.
poonam

राज भाटिय़ा said...

निर्मला जी अगर हमारे घर मै इस तरह से महिला दिवस मानाया गया तो हम बाप बेटा तो पागल हो जायेगे,क्योकि हमारी बीबी ने सब को अपना गुलाम ,
ना बाबा ना, ओर हमारी बीबी भी नही मनाना चाहती यह दिवस, जो मानते है उन्हे बधाई

singhsdm said...

आदरणीया,
बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आ सका क्षमा प्रार्थी हूँ......
महिला दिवस पर आपका व्यंग सटीक है.......फिर भी महिला दिवस की बधाई आपको देने से खुद को नहीं रोक प् रहा हूँ....!

रचना दीक्षित said...

महिला दिवस पर एक बहुत अच्छी प्रस्तुती धन्यवाद. आपने तो अपने घर का इतिहास बदल लिया पर एक हफ्ते के बाद क्या घर का हाल देख कर आपको ऐसा नहीं लगा की घर का भूगोल भी बदल गया, उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम का कोई छोर मिला क्या? चलो मैं भी कोशिश करके देखूं !!!!

डॉ टी एस दराल said...

हा हा हा ! सचमुच घर का इतिहास बदल गया ।
बढ़िया हास्य -व्यंग रचना ।
आपके ब्लॉग का बदला हुआ रूप बहुत पसंद आया ।

सुलभ § सतरंगी said...

धन्यवाद!!
.
.
ऐसे मनाये महिला दिवस

सर्वसाधारण के हित में >> http://sukritisoft.in/sulabh/mahila-diwas-message-for-all-from-lata-haya.html

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर रचना.

रामराम.

M.A.Sharma "सेहर" said...

निर्मला जी
दिल्ली आ कर चले भी गए :((


और महिला दिवस की बधाई के साथ साथ मजेदार व्यंग के लिए भी बहुत बधाई !!..:))))

sadar !

डॉ. मनोज मिश्र said...

तब सोचा ना था कि
ये महिला दिवस
इतना रंग लायेगा
कि अपने घर का
इतिहास बदल जायेगा...
vaah,gzb.

अजय कुमार said...

महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

योगेश स्वप्न said...

wah nirmalaji, bahut sunder vyangya rachna, mahila divas par.

"अर्श" said...

ब्यंग की बात करूँ की आपसे मिलने की दोनों ही सुखद अनुभूति प्रदान कर रहा है ... मगर काजू की कतली उफ्फ्फ्फफ्फ़ आपको कैसे पता ...:)


अर्श

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सशक्त रोचक अभिव्यक्ति!

नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

अनामिका की सदाये...... said...

maja aa gaya rachna ko padh kar
aur sara vrataant..chalchitr ban kar
ghoom gaya..
dekha chalchitr me baal bikhre hue pati dev ke...
aur baccho ko unki lungi idhar se udhar kheechte hue...
raat ko tum laut k aayi to pati farsh par pade behosh the..
taang kya dabate maa ki, vo khud hi murchhit se maa ki god the..
pakad rahe the pair jab laut k aayi aap
kaan pakad ke bole na sataunga tumhe..na dunga aadesh
le lo shapath chahe meri ikloti maa ki.

(HA.HA.HA.HA.HA.HA.)

sangeeta swarup said...

आपने तो दिन में तारे दिखवा दिए....बहुत बढ़िया हास्य :):)

RaniVishal said...

ha ha ha idea to mazedaar bataya hai aapme :)
Mahila Diwas ki shubhkaamnaae!!

सूर्यकान्त गुप्ता said...

रचना बहुत ही बढ़िया व्यंग के रूप में
किन्तु आश्चर्य की बात यह है इस संस्कार प्रधान देश में रिश्ते नातों को
याद किया जा रहा है "दिवस" के रूप में
Mother's day, Father's day, Women's day
आदि आदि. क्या इन दिवसों के बिना अनवरत प्रगाढ़
प्रेम कायम नहीं रह सकता ??

काजल कुमार Kajal Kumar said...

...और फिर नींद खुल गई होगी :)

Parul said...

:))))))

ज्योति सिंह said...

waah bharpur aanand liya ,adhikaar par haq jatana bhi jaroori hai .bahut sundar

Srijan said...

रोचक प्रस्तुति

रोली पाठक said...

वाह-वाह... निर्मलाजी, हास्य-व्यंग पढ़कर
आनंद आ गया! काश ऐसा कोई हफ्ता
वाकई आये...पतिदेव घर को कबाडखाना
चौके को कबाड़ी की दुकान बना कर रख
देंगे, बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे और खाना
रोज़ होटल से आएगा हा-हा-हा....!!

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