23 December, 2009

एक पुरानी कविता जो अभी आप लोगों ने पढी नहीं है। आज भी नया कुछ लिख नहीं पाई। तो इसे ही झेलले़ ।
कविता
मुझे मेरे दिल के करीब रहने दो
न पोंछो आँख मेरी अश्क बहने दो
ये इम्तिहां मेरा है जवाब् भी मेरा होगा
दिल का मामला है खुद से कहने दो
जीते चले गये ,जिन्दगी को जाना नहीं
मुझे मेरे कसूर की सजा सहने दो
उनकी जफा पर मेरी वफा कहती है
खुदगर्ज चेहरों पे अब नकाब रहने दो
तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो !!

40 comments:

महफूज़ अली said...

Mom........... यह कविता दिल को छू गई..... बहुत सुंदर.....

Mithilesh dubey said...

माँ जी चरण स्पर्श

क्या बात है , लाजवाब कविता लगी माँ , बेहद भावपूर्ण रचना ।

वाणी गीत said...

घर की बात घर में रहने दो ....
खुदगर्ज़ चेहरों पर नकाब रहने दो ...
दिल की बात दिल में रहने दो ...

कहाँ रह पाती है ...कहानी कविताओं में झलक ही जाती है ..!!

Kusum Thakur said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो "

कितनी अच्छी बात कही है आपने !बधाई !!

डॉ टी एस दराल said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो "

सही बात कही है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत बढ़िया है जी!
सुन्दर रचना बार-बार पढ़ने भी अच्छी लगती है!

आशुतोष दुबे 'सादिक' said...

सही बात कही है. बहुत सुन्दर रचना है .
हिन्दीकुंज

अजय कुमार said...

बहुत अच्छी रचना , अंतिम लाइनों में एक अच्छी नसीहत

जी.के. अवधिया said...

"उनकी ज़फा पर मेरी वफा कहती है ..."

हमने ज़फा ना सीखी उनको वफा ना आई पत्थर से दिल लगाया और दिल पे चोट खाई ...

खुशदीप सहगल said...

पास बैठो तबीयत बहल जाएगी,
मौत भी आ गई है तो टल जाएगी...

जय हिंद...

Kulwant Happy said...

शानदार है कविता..तो टिप्पणी भी खुले दिल से देने दो।

पी.सी.गोदियाल said...

तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात घर में रहने दो !
अति सुन्दर !

अन्तर सोहिल said...

"जीते चले गये जिन्दगी को जाना नहीं"

छोटी पंक्तियों में बडी बातें
बहुत बहुत अच्छी लगी यह कविता
आपका हार्दिक धन्यवाद

प्रणाम स्वीकार करें

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो "

बहुत सुन्दर एवं खरी बात कही आपने....अगर इन्सान इतनी सी बात समझ जाए तो सारे झगडे ही निपट जाएं !

sangeeta said...

तकरार से भी फासले नहीं मिटते
घर कि बात घर में ही रहने दो....


बहुत सटीक अभिव्यक्ति .....सुन्दर रचना ...बधाई

परमजीत बाली said...

बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति है........बहुत सुन्दर रचना है.बधाई.

तकरार से भी फासले नहीं मिटते
घर कि बात घर में ही रहने दो....

बिल्कुल सही कहा है।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुन्दर लगी आपकी यह रचना शुक्रिया

वन्दना said...

bahut hi khoobsoorat ,nasihat deti rachna.......badhayi

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

wakai..ghar ki baat hai...ghar mein he rehne do...

umda rachna...

cheers
http://shayarichawla.blogspot.com/

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, लाजबाव रचना

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर अनुभूति.

मनोज कुमार said...

"ये इम्तिहान मेरा है, जवाब भी मेरा होगा....."
वाह.... अदम्य जिजीविषा की रचना ! आपकी लेखनी को सलाम !!

दिगम्बर नासवा said...

एक बार फिर से आनंद ले रहा हूँ आपकी ग़ज़ल का ..........

M VERMA said...

बहुत सुन्दर् लगी आपकी यह रचना

KAVITA RAWAT said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो "

Bilku sahi Kaha Maaji.
Bahut achhi rachna...

राजीव तनेजा said...

तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो...

बहुत बढिया.....

आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...अब तो लगातार आना ही पड़ेगा

योगेश स्वप्न said...

unki jafa..........ghar men rahne do.

wah. nirmala ji kamaal ka likha hai.

Udan Tashtari said...

सुन्दर भावों की खूबसूरत बानगी!! वाह!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो "
क्या बात है निर्मला जी. बहुत सुन्दर रचना.

Anamika said...

me pehli baar apke blog par aayi hu aur ye kavita bahut acchhi lagi kuch dil k bilkul kareeb si. thanks for sharing.

Jogi said...

waah...ghar ki baat ghar mein rehne do ..
bahut achha likha ji aapne !!!

Sadhana Vaid said...
This comment has been removed by the author.
Mrs. Asha Joglekar said...

घर की बात है घर में ही रहने दो । कितना सही कह रही हैं ।

AKHRAN DA VANZARA said...

Bahut sundar kavita...
"taqraar se faasle nahi mit-te..."
WAH.... WAH ... Kya baat hai...

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर दिल को छूते शब्‍दों के साथ अनुपम रचना, आभार

सुलभ सतरंगी said...

ये इम्तिहां मेरा है जवाब भी मेरा होगा....
>
घर की बात है हर में रहने दो...


बेहतरीन पंक्तिया हैं... गज़लरुपी कविता दिल को छूती है.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Saade aur sundar bhaav.

--------
अंग्रेज़ी का तिलिस्म तोड़ने की माया।
पुरुषों के श्रेष्ठता के 'जींस' से कैसे निपटे नारी?

शोभना चौरे said...

purana sona khara hai .
achhi kavita abhar

संजय भास्कर said...

बेहतरीन पंक्तिया हैं... गज़लरुपी कविता दिल को छूती है.

संजय भास्कर said...

Mummy ji......
नमस्कार!

आदत मुस्कुराने की तरफ़ से
से आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Sanjay Bhaskar
Blog link :-
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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