08 February, 2009


मेरे रहनुमां
दुनिअ के तमाम रिश्ते
मेरे लिये गुमनाम बन गये
ये चँद कागज़ के टुकडे
दिल के राज़दान बन गये
जो कह सके ना अपनों से बात
उसकी ये दास्तान बन गये
अब ना किसी दोस्त न हमदम की तमन्ना
ये मेरी तमन्नाओं के चाहवान बन गये
ये चुभायेंगे ना तीर अपनी जफा का ज़िगर में
ये मेरे दर्दे ज़िगर क हम नाम बन गये
चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये
आये हैं इनकी बदौलत आपकी महफिल में
शुक्रिया इनका हम इस महफिल के कद्र्दान बन गये !!

11 comments:

"अर्श" said...

चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये

गज़ब का लेखन परिचय बहोत ही उम्दा लिखा है आपने बेहतरीन .... ढेरो बधाई आपको..


अर्श

Pratap said...

बहुत ही मोहक है ...

Shikha Deepak said...

चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये

बहुत सुंदर।

SWAPN said...

khoobsurat rachna hai. badhai.

hem pandey said...

चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये
आये हैं इनकी बदौलत आपकी महफिल में
शुक्रिया इनका हम इस महफिल के कद्र्दान बन गये

- बहुत सुंदर.

अनिल कान्त : said...

क्या लिखा है आपने ...बहुत खूब
चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये
....
जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है

अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर आप की यह कविता, जब प्यार होता है तो सही हाल होता है.
धन्यवाद

the pink orchid said...

kavita bahut hi sundar hai..aakhiri do panktiyon ne to dil mein ghur kar liya..

Nirmala ji aapke blog ka header jahaan aapke blog ka naam likha hai uska aakaar zarurat se zyada bada hai, main uska aakaar sudhaar kar aapko mail kar rahi hoon , aap email se download kar ke laga lijiyega. aapse anjaane mein hi ek judaav sa ho gaya .. kuchh karne ka dil kiya ...socha yahi sahi...

aapki profile mein jo email address hai us par bhej dungi .
likhte rahiye..

विनय said...

सुन्दर है, बधाइयाँ


---
गुलाबी कोंपलें

Tapashwani Anand said...

चीरते हैं कलम से इनका दिल तो उफ नहीं करते
ये कागज़ मेरे कितने मेहरवान बन गये
आये हैं इनकी बदौलत आपकी महफिल में
शुक्रिया इनका हम इस महफिल के कद्र्दान बन गये


bahut khub likha hai ||||

Abhishek said...

अब ना किसी दोस्त न हमदम की तमन्ना
ये मेरी तमन्नाओं के चाहवान बन गये
Bahut hi sundar panktiyan.

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