07 April, 2009


गज़ल्


वफा सब को रास आये ये जरूरी तो नहीं
मुकद्दर सब पे मुस्काये ये ज़रूरी तो नहीं

कितने अफसाने उनके कितने दिवाने उनके
फिर भी वो तेरे दर पे आये ये जरूरी तो नहीं

वो हसीन पलों की यादें बहुत हैं जीने के लिये
वो पल फिर जीते जी आयें ये ज़रूरी तो नहीं

मेरे लिये कुछ भी नहीं अहम उनके सिवा
ये एहसास उन्हें भी आये ये जरूरी तो नहीं

उल्फत यही है कि उनकी राहें आज़ाद कर
वो तेरेही दामन से बंध जाये ये जरूरी तो

दिल क्यों लगाता है किसी की शोखियों पर पहरे
वो तेरे ही गीत गाये ये जरूरी तो नहीं

शिकवा ना कर वफा यूँ ही निभाये जा
ज़फा उनको भी रास आये ये जरूरी तो नहीं

सब्र कर वक्त की गुज़ारिश है यही
तू उनको ना याद आये ये जरूरी तो नही

17 comments:

SWAPN said...

वफा सब को रास आये ये जरूरी तो नहीं
मुकद्दर सब पे मुस्काये ये ज़रूरी तो नहीं
bahut khoob , sunder rachna, sabhi sher umda. badhai

mehek said...

मेरे लिये कुछ भी नहीं अहम उनके सिवा
ये एहसास उन्हें भी आये ये जरूरी तो नहीं
उल्फत यही है कि उनकी राहें आज़ाद कर
वो तेरेही दामन से बंध जाये ये जरूरी तो
waah bahut sunder

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया गजल लिखा है आपने ... बधाई।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"वफा याद आयें सबको,
ये बिल्कुल नही जरूरी है।
जुल्म, जफाओं को सहना,
इस जीवन की मजबूरी है।"

बहिन जी! आपकी गजल सुन्दर है।
बधायी।

"अर्श" said...

bahot hi khubsurat gazal... bahot hi saamyata se likhi gayee hai... bahot badhayee aapko..


arsh

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया गज़ल है।बधाई।

Abhishek Mishra said...

दिल क्यों लगाता है किसी की शोखियों पर पहरे
वो तेरे ही गीत गाये ये जरूरी तो नहीं

बेहद सुन्दर भाव. बधाई.

विनय said...

कपिला जी बहुत ख़ूब, रंग जमा दिया आपने! वह-वाह!

रंजना said...

मेरे लिये कुछ भी नहीं अहम उनके सिवा
ये एहसास उन्हें भी आये ये जरूरी तो नहीं


Bas yahi to sachcha prem hai...bina pratidaan ki apeksha ke kiya jane wala prem hi vastav me prem hai...

bahut bahut sundar gazal likhi aapne...bahut hi sundar.

ओम आर्य said...

mere blog pe visit karne aur pratikriya dene ke liye dhanyavad.

aapke blog pe pahli baar jaane ka mauka mila, achchha laga.

R.K. said...

"वो हसीन पलों की यादें बहुत हैं जीने के लिये
वो पल फिर जीते जी आयें ये ज़रूरी तो नहीं
मेरे लिये कुछ भी नहीं अहम उनके सिवा
ये एहसास उन्हें भी आये ये जरूरी तो नहीं"

bahut achha likha hai.
main iska sms banalun ??

अमिताभ श्रीवास्तव said...

मेरे लिये कुछ भी नहीं अहम उनके सिवा
ये एहसास उन्हें भी आये ये जरूरी तो नहीं...


kya baat he, meri ek kavita ke kuchh isi tarah ki pankti yaad aa gai.

जरूरी नही
इश्क में
किसीका राज़ी होना,
नाम दिल में
सजाकर भी
लोग उम्र गुजारते है।
.....

aapki rachna behad umda he.

Dev said...

Maa Pranaam,
Kaisi hai App, edahr babhut dino bad blog par aa raha hoon, job ko lekar kuchh pareshan tha. Achchha lagata hai aapse bate karna...Aur aap ke aashish se mera man khush ho jata hai.
Aapki Gazal padi bahut achchhi lagi...
वफा सब को रास आये ये जरूरी तो नहीं
मुकद्दर सब पे मुस्काये ये ज़रूरी तो नहीं

Maa Pranaam.

M.A.Sharma "सेहर" said...

उम्दा ग़ज़ल निर्मला दी
हर शेर अपने आप में बेहतरीन अर्थ समाये हुवे

बहुत खूब !!!

सादर !!

श्याम सखा 'श्याम' said...

वफा सब को रास आये ये जरूरी तो नहीं
----
वो पहली मुह्ब्बत भुलाई न जाए
करूं लाख कोशिश मगर याद आए

कविता या गज़ल में हेतु मेरे ब्लॉग पर आएं
http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
http:/katha-kavita.blogspot.com दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम’

Shama said...

Rachnakee harek pankti apneaap me ehem hai...anupam aur atuly hai...mai aapke lekhanpe kuchhbhi tippanee karun, itnee qabiliyat nahee rakhtee....kshama prarthi hun...
Gar mai apne kuchh bligs kaa link dun to aap bura to nahee manegi?

"Kavita"(waise mai na kavi hun naa lekhak..)

"Kahanee"

"Sansmaran"

"Lalitlekh"

"Aajtak Yahantak"

"Baagwaanee( isme kewal maloomat nahee, jeevanke prati ek nazariya hai)

"Gruhsajja"( ye mera pesha hai..is blogme kuchh apnehee gharkee tasveeren tatha tips likhi hain)

"Fiber art"( Isme apnee kala ki kuchh tasveeren load kar rahi hun...Bharatme akeli fiber artist hun...sirf parichayke khatir kaha...pls, ise mera guroor na samajhen!)

"Chindichindi"( recycling dwara saundarynirmiti aur paryawaran raksha)

"Dharohar"( Bharatke bunkar pooree duniyame bemisaal hain...lekin badhaal ho rahe hain..kala nasht ho rahi hai...ek janjagrutika chhota-sa pryas)

"Paridhan"( Yahanbhi recycling dwra banaye gaye kuchh poshakh...dheere dheere load kar rahee hun).

Bohot garv mehsoos karungi, khusheeke alawa gar aap samay nikal mere kisee blogpe padharen...

Pakhi said...

Apki gazal acchi lagi, ap bahut sundar likhti hain.

Is bar blog par meri nai photo dekhen.

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