20 February, 2009

  1. (कविता)


    सपने सहेजना सNumbered Listपने सजाना
    आ ही गया हमे दिल लगाना
    हकीकत मे खुश है भी कौन
    आता है मुझे कुछ खो कर कुछ्पाना
    रोज़ चली जाती हूँ सपनो के चाँद पर
    वो लायेगा कभी चाँद ये किसने जाना
    सपने सहेजना सपने सजाना-------------
    ज़िंदगी की धूप छाँव को
    कल्पनाओं के पर लगानराकाश छूना
    कभी सागार मे उतर जाना
    सपने सहेजना सपने सजाना-----------
    सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
    फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना
    हकीकत मे शायद वो कभी मिले य ना मिले
    सपनो मे लगा रहेगा उसका आना जाना
    सपने सहेजना सपने सजाना
    आ ही गया हमे दिल लगाना-

17 comments:

seema gupta said...

सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना
" सुबह सुबह हसीं सपने दिखा दिए आपने....सच कहा जो पल दो पल का सुकून है वो सपनो में ही है..."

Regards

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अँखियों में निंदिया नही आती,
निर्मल सपने आते है।
स्वप्न याद कर मेरे नयना,
खारा नीर बहाते हैं ।।

कल्पनाओं के नये-नये,
कुछ पंख निकल आते हैं।
धरती से उड़ जाते और
आकाश तलक जाते हैं।।

भाव भरी है कविता,
लेकिन छन्द नही बन पाता है।
थोड़ा सा प्रयास करो,
पथ निश्चित ही मिल जाता है।।

Amit said...

bahut sundar kavita hai...

Mumukshh Ki Rachanain said...

वाह! जितना सुंदर भावः उतना ही सुंदर गीत . बधाई स्वीकार करे. निम्न पंक्तिया विशेष लगी ....
सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना

चन्द्र मोहन गुप्त

रंजना [रंजू भाटिया] said...

हकीकत मे शायद वो कभी मिले य ना मिले
सपनो मे लगा रहेगा उसका आना जाना
सपने सहेजना सपने सजाना
आ ही गया हमे दिल लगाना-

बहुत सुंदर सच ..

भारत मल्‍होत्रा said...

सच कहा सपनों में ही असली सकून मिलता है। लेकिन, हकीकत की तस्‍वीर सपनों से बिल्‍कुल अलग होती है।

SWAPN said...

sunder rachna.

hem pandey said...

सपनों का अपना अलग आनंद होता है और वह आनंद आपकी कविता में मिला.

विनय said...

हर बार की तरह ही अच्छी लगी।

---
गुलाबी कोंपलें
सरकारी नौकरियाँ

Dev said...

Pranam maa,
Aap ki ek aur bahut sundar kavita
सपने सहेजना सपने सजाना
आ ही गया हमे दिल लगाना-
ye sapne hi to apne hai...
aur sapne bhi to ek jeevan ki tarh hai...
Aap ki har kavita padh kar maa(aapke) ke prati pyar aur aadar aur badh jata hai...

राज भाटिय़ा said...

वाह क्या बात है...
सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना.
बहुत ही सुंदर कवित कही आप ने,
अजी आप तो हमारी पडोसी है, हमारा गांव गढशंकर के पास है.

JHAROKHA said...

सपने सहेजना सपने सजाना-----------
सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना
हकीकत मे शायद वो कभी मिले य ना मिले
सपनो मे लगा रहेगा उसका आना जाना
सपने सहेजना सपने सजाना
आ ही गया हमे दिल लगाना-

Respected Nirmala ji,
bahut sundar panktiyan hain ..man ko chhoo lene vali.
Poonam

अविनाश said...

ज़िंदगी की धूप छाँव को
कल्पनाओं के पर लगानराकाश छूना
कभी सागार मे उतर जाना
सपने सहेजना सपने सजाना-----------

बहुत खूब, एक बेहद सुन्‍दर और सफल प्रयास.
शुक्रिया

http://avinash-theparaiah.blogspot.com/

प्रदीप मानोरिया said...

सपनों की छाँव मे दो पल सकून ले लें
फिर ज़िन्दगी मिले ये किसने जाना
सुंदर कविता बधाई
मेरे ब्लॉग पर पधार कर "सुख" की पड़ताल को देखें पढ़ें आपका स्वागत है
http://manoria.blogspot.com

MUFLIS said...

शब्द-शब्द आपके दिल की भावनाओं की
सुंदर अभिव्यक्ति .......
अनुपम नवगीत को परिभाषित करती हुई
बहुत अच्छी रचना .....
बधाई..........................
---मुफलिस---

महावीर said...

सुंदर रचना है।
हकीकत मे शायद वो कभी मिले य ना मिले
सपनो मे लगा रहेगा उसका आना जाना
सपने सहेजना सपने सजाना
आ ही गया हमे दिल लगाना-
बहुत सुंदर पंक्तियां हैं।

Bandmru said...

वाह क्या बात है...
सपने सहेजना सपने सजाना
आ ही गया हमे दिल लगाना-
बहुत खूब

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