यह कविता मै पहले भी लिख चुकी हूँ मगर आज ये सिर्फ मै विनिता यशस्वी के लिये विशेष तौर पर लिख रही हूँ1जीवन को एक चुनौती की तरह स्वीकार करो और इन अंधेरों से बाहर आ कर अपनी राहें खुद तलाश करो1फिर देखो जिन्दगी कैसे तुम्हारे कदम चूमती है1ये भी याद रखो कि दुनिया कभी किसी पर रहम नहीं करती बल्कि तुम्हारी कमज़ोरियों का लाभ उठाने से नहीं चूकती1सुख दुख दोनो के बिना जीवन के मर्म को जाना ही नहीं जा सकता !
चमक दिखाता हीरा जब पत्थर से घिसाया जाता है
श्रममार्ग के पथिक बनो अवरोधों से जा टकराओ
मंजिल पर पहुँचोगे अवश्य बस रुको नहीं बढते जाओ
बदल जायेगी तकदीर
श्रम और आत्म विश्वास हैं ऐसे संकल्प
मंजिल पाने के लिये नहीं कोई और विकल्प
पौ फटने से पहले का घना अँधेरा
फिर लायेगा इक नया सवेरा
देखो निराशा मे आशा की तस्वीर
तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर
बस दुख मे कभी भी ना घबराना
जीवन के संघर्षों से ना डर जाना
युवा शक्ति पुँज बनो तुम कर्मभूमी के वीर
तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर
नयी सुबह लाने को सूरज को तपना पडता है
धरती कि प्यास बुझाने को बादल को फटना पडता है
मंजिल तक ले जाती है आशा की एक लकीर
तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर्
