(कविता )
याद आये
फिर देख आये उन गलियों को
कुछ घाव पुराने याद आये
बीते हुये कल के झरोखों से
कुछ ख्वाब सुहाने याद आये
पहले भी ना भूले थे वो कभी
अब रोने के बहाने याद आये
अपने ही घर से बेघर जो किया
अपनो के नज़राने याद आये
उन भूले बिखरे रिश्तों के
दिलखौफ विराने याद आये
दिल मे इक हसरत बाकी है
उन्हें पिछले जमाने याद आये
कभी खून से खून जुदा न हो
फिर मिलने के बहाने याद आये
फिर देख आये उन गलियों को
कुछ घाव पुराने याद आये
बीते हुये कल के झरोखों से
कुछ ख्वाब सुहाने याद आये
पहले भी ना भूले थे वो कभी
अब रोने के बहाने याद आये
अपने ही घर से बेघर जो किया
अपनो के नज़राने याद आये
उन भूले बिखरे रिश्तों के
दिलखौफ विराने याद आये
दिल मे इक हसरत बाकी है
उन्हें पिछले जमाने याद आये
कभी खून से खून जुदा न हो
फिर मिलने के बहाने याद आये
