तुम थे हम हैं
जीत उसकी नहीं जिसने किसी को ठुकराया
जीता वो जिसने हार कर भी ना इमान भुलाया
वो तुम थे जो मेरी नज़र से दुनिया देखा करते थे
अज मेरे सामने हो कर भी दुनिया को देख रहे हो
वो तुम थे जो मेरी जरा सी चुभन से रो देते थे
आज भी तुम हो जो जिगर मे तीर चुभो कर हंसते हो
वो तुम थे जो मेरी साँस से अपनी नब्ज़ देखा करते थे
आज भी तुम हो जो मेरी टूटी साँसों से राहत ले रहे हो
इस फर्क को समझो तो जीत इमान की हुई
तुम कभी हुअ करते थे हम अब भी वहीं हैं
जीत उसकी नहीं जिसने किसी को ठुकराया
जीता वो जिसने हार कर भी ना इमान भुलाया
वो तुम थे जो मेरी नज़र से दुनिया देखा करते थे
अज मेरे सामने हो कर भी दुनिया को देख रहे हो
वो तुम थे जो मेरी जरा सी चुभन से रो देते थे
आज भी तुम हो जो जिगर मे तीर चुभो कर हंसते हो
वो तुम थे जो मेरी साँस से अपनी नब्ज़ देखा करते थे
आज भी तुम हो जो मेरी टूटी साँसों से राहत ले रहे हो
इस फर्क को समझो तो जीत इमान की हुई
तुम कभी हुअ करते थे हम अब भी वहीं हैं
