06 January, 2011

gगज़ल gazal

ये गज़ल दोबारा पोस्ट की पहले एक दो गल्तियाँ थी उन्हें सही करते हुये पोस्ट डिलीट हो गयी कृप्या इसे दोबारा देखें। असुविधा के लिये खेद है।


गज़ल 
देखो उनकी यारी रामा
दुनियाँ है दो धारी रामा

खाली बैठे तोडें कुर्सी
नौकर हैं सरकारी रामा

माँग रहे बेटों की कीमत
रिश्तों के व्यापारी रामा

कैसे कैसे नाच दिखाये
नारी की मत मारी रामा

मजबूरी रिश्ते ढोने की
पिछला कर्जा भारी रामा

सात जनम का झूठा वादा
एक जनम ही भारी रामा

खोटे सिक्के शान से चलते
सच्चाई तो हारी रामा

ऊपर है बाना साधू का
मन मे पर मक्कारी रामा

झूठे रिश्ते झूठे नाते
ये है दुनियादारी रामा

होड लगी है बस दौलत की
होती मारा मारी रामा

दाल दही थाली से गायब
हो गयी चीनी खारी रामा

रोटी कपडों के लाले हैं
लोगों की लाचारी रामा

रिश्वत दे कर सम्मानों की
करते दावेदारी रामा

68 comments:

संजय भास्‍कर said...

आदरणीय निर्मला जी
नमस्कार !
.............सुन्दर सशक्त संदेश

संजय भास्‍कर said...

.हर शेर का एक ख़ास मतलब है ...बढ़िया गजल ...शुक्रिया

निर्मला कपिला said...

अज अपनी गलती सही करते हुये मुझ से पोस्ट ही डिलीट हो गयी जिस पर इन सब के कमेन्ट्स आ चुके थे
1 संजय भास्कर [दोबारा कमेन्ट देने के लिये शुक्रिया\
2आशा जी
3 सोमेश सक्सेना जी
4 अजीत गुप्ता जी
5 वन्दना जी
6 अभि जी
7 इस्मत ज़ैदी जी
8 रश्मि जी
9 हर्षवर्धन जी
10 सदा जी
11 सुशील बकलीवाल जी
12सुरिन्द्र मुह्लिद
12डा. रूपचन्द शास्त्री मंयक जी
14 वाणी जी
15 अन्तर सोहिल जी
16 अरविन्द जी
17 ग्यानचंद मर्मग्य जी
इन्दर्जीत भट्टाचार्य सैल जी
18 श्री दिनेश राय दिवेदी जी
इन सब से क्षमा चाहती हूँ। कृ्प्या अन्यथा न लें।

abhi said...

अरे कोई बात नहीं...ये तो होता रहता है...आप बेवजह ही क्षमा मांग रही हैं ... :)

Unknown said...

jai siya rama,jai siya rama---------------------------------------------------------------------------------rama,rama

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

Nirmala jee, kshama mang kar hamein sharminda na karein ... aapki lajawaab ghazal ko phir se kya baar baar padhne ko jee karta hai ...

गिरधारी खंकरियाल said...

सबकी सामत आयी रामा !

राज भाटिय़ा said...

कोई बात नही जी, यह हो जाता हे, धन्यवाद

Mithilesh dubey said...

हर शेर का एक ख़ास मतलब है ...बढ़िया गजल ...शुक्रिया

Mithilesh dubey said...

हर शेर का एक ख़ास मतलब है ...बढ़िया गजल ...शुक्रिया

Shah Nawaz said...

बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल है निर्मला जी.... हर एक शेअर मायनेखेज़ है...

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

वाह ! बहुत सुंदर :)

shikha varshney said...

एकदम अलग तरह की गज़ल है
बहुत ही बढ़िया.

rashmi ravija said...

समाज की विसंगतियों पर
बहुत ही बढ़िया, रचना

Bharat Bhushan said...

इस रचना में आपने बहुत से भावों को समेटा है. 'रामा' ने मानवीय व्यथा ढोने का कर्तव्य निभाया है. बहुत अच्छी ग़ज़ल.

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut badiya rachna

Satish Saxena said...

आनंद दायक पोस्ट ...शुभकामनायें !

arvind said...

sabhi sher kaabile-taareef.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

निम्मो दी!!
समाज की वर्त्तमान स्थिति को आईना दिखाती ग़ज़ल!!

डॉ टी एस दराल said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है निर्मला जी ।
नव वर्ष की शुभकामनायें ।

Manish aka Manu Majaal said...

ग़ज़ल पर ऐसे ऐसे प्रयोग,
ब्लॉगिंग की महिमा न्यारी रामा ;)

ऐसे ग़ज़ल तो कहीं नहीं पढ़े ;)
लिखते रहिये ....

मनोज कुमार said...

• इस ग़ज़ल में अपने समय और समाज की गहरी पहचान नज़र आता है।

Sunil Kumar said...

खुबसूरत शेर बहुत बहुत बधाई
नव वर्ष की शुभकामनाये ,नया साल आपको खुशियाँ प्रदान करे

दिनेशराय द्विवेदी said...

लो हम फिर से आ गए।
पुरानी टिप्पणियों को मेरे खयाल से ब्लागर में जा कर देखा जा सकता है।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

वाह!आज तो कुछ नया ही पढ़ने को मिला।
..कविता को आम जन से जोड़ने के लिए आम जन द्वारा समझी जा सकनी भाषा में भी अवश्य लिखा जाना चाहिए। इस कोशिश में यह ध्यान रखना होगा कि सरलतम भाषा में गहनतम चिंतन रखा जा सके क्योंकि आमजन भाषा नहीं सार बखूबी समझते हैं। इस दृष्टि से आपकी इस गज़ल महत्व अधिक है।

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

ला-जवाब, बेहतरीन गजल....
हर शेर उम्दा!!!

प्रवीण पाण्डेय said...

निर्मम और सपाट व्यंग।

उपेन्द्र नाथ said...

कपिला जी, बहुत ही अच्चा व्यंग कसा है आपने इस ग़ज़ल के माध्यम से ... संदर प्रस्तुति.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

सात जनम का झूठा वादा
एक जनम ही भारी रामा
रिश्ता अगर बोझ हो, तो हर पल भारी हो जाता है, बहुत ही सच्चा शेर है...
खोटे सिक्के शान से चलते
सच्चाई तो हारी रामा...
हर तरफ़ यही देखने को मिल रहा है...
बहुत अच्छी ग़ज़ल है.

रचना दीक्षित said...

लाजवाब..... एक एक शेर खजाने से ढूंढ़ कर लायीं हैं आप

ZEAL said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है !!

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

रिश्वत देकर,सम्मानों की '
करते दावेदारी रामा। बेहतरीन शे'र , सार्थक और उम्दा ग़ज़ल , निर्मला कपिला जी को मुबारकबाद।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

एक से बढ़कर एक..

SATYA said...

बढ़िया गजल.

रश्मि प्रभा... said...

chaliye isi bahane phir aapka post upar aa gaya aur ek baar phir main gazal ke saath ho gai ....

PAWAN VIJAY said...

अब क्या होगा रे रामा
देश तेरे भरोसे रे रामा
लाजवाब

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

arey anayatha lene wali kya baat hai ji.......achi rachna hai....

raama re raama!

रंजना said...

हर एक शेर पर सिर्फ वाह वाह वाह कहते चले जाने को जी चाह रहा है...

क्या लिखा है आपने...ओह..लाजवाब !!!!

आपको और आपके कलम को नमन,इस अद्वितीय कृति के लिए....

शूरवीर रावत said...

आप इतना सुन्दर लेख, कहानियां, कवितायेँ, ग़ज़ल आदि कैसे लिख लेती है निर्मला जी?..... मैंने तो जब भी लिखना चाहा, एक सिरा पकड़ो तो दूसरा छूट जाता है .......... बहरहाल!
इस सुन्दर रचना के लिए आभार.

nilesh mathur said...

वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर!

Sadhana Vaid said...

बहुत बढ़िया गज़ल है निर्मला दी ! हर शेर गहन भाव को समेटे हुए है और हर व्यंग चुटीला है ! अपनी रचना में आपने जीवन की विषमताओं को बड़ी खूबी से अभिव्यक्त किया है ! मेरी शुभकानाएं स्वीकार करें !

अजय कुमार said...

इतनी सुंदर गजल लिखी है
मैं तो हूं बलिहारी रामा ।

Asha Lata Saxena said...

गजल के शब्द बहुत सुन्दर और गहन अर्थ लिए हुए हैं |बधाई |
आशा

पूनम श्रीवास्तव said...

aadarniy mam
abhi tak to aapke lekh v sasmaran hi padhti aai thi,par aap gazal bhi utni hi khubsurati ke saath likhti hain ,aapki likhi pichhle gazlo ko bhi padha .bahut hi bahatreen tath yatharthata se bhari bilkul sateek gazlen hai aapki---

hardik bhinadan karti hun---
poonam

daanish said...

मांग रहे बेटों की कीमत
रिश्तों के व्योपारी, रामा
खोते सिक्के शान से चलते
सच्चाई तो हारी, रामा

ग़ज़ल का हर शेर अपने आप में सम्पूर्ण है
भाव और कहन लाजवाब हैं ...
बधाई .

कविता रावत said...

मांग रहे बेटों की कीमत
रिश्तों के व्योपारी, रामा
खोते सिक्के शान से चलते
सच्चाई तो हारी, रामा
....माँ जी!
जीवन का कटु सत्य उजागर कर रही है आपकी ग़ज़ल की हर पंक्ति.....
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना

mridula pradhan said...

har pangti lajabab.

दिगम्बर नासवा said...

छोटी बहर पे लिखी लाजवाब ग़ज़ल है ...
आपके विचार स्पष्ट और अभिव्यक्ति कमाल की होती है हमेशा ..

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

निर्मला जी, छोटी बहर में बहुत प्‍यारी गजल।

---------
पति को वश में करने का उपाय।

Sushil Bakliwal said...

जीना हुआ मुहाल रे रामा.

Creative Manch said...

वाह क्या बात है
बहुत खूब - बहुत सुन्दर

"सात जनम का झूठा वादा
एक जनम ही भारी रामा
खोटे सिक्के शान से चलते
सच्चाई तो हारी रामा"

पूरी रचना में हमारे समाज की नब्ज है.
हर पंक्ति सत्यता लिए असरदार है
एक जगह पर थोड़ी मुस्कान आ गयी :
"दाल दही थाली से गायब
हो गयी चीनी खारी रामा"

सोच रहे थे की यहाँ चीनी की जगह
प्याज हो सकता है कि नहीं :)

शिक्षामित्र said...

राम-राम!

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

निर्मला जी,
मुझे तो बार बार पढ़कर भी यह ग़ज़ल नई लगती है !
आज के दौर की संवेदना से लबालब भरी है आपकी ग़ज़ल !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

महेन्‍द्र वर्मा said...

वाह, निर्मला जी, बेहतरीन ग़ज़ल है यह।

समाज की विसंगतियों पर अच्छा कटाक्ष किया है आपने।
बधाई।

dipayan said...

बहुत खूब निर्मलाजी । आज की समाज की मानसिकता को दर्शाती हुई एक सुन्दर गज़ल ।
नये साल की बधाई स्वीकारे ।

योगेन्द्र मौदगिल said...

wahwa....achhi rachna....sadhuwad..

Razi Shahab said...

बेहतरीन रचना

Pratik Maheshwari said...

वाह वाह वाह!
क्या बेहतरीन रचना है ये..
बहुत ही सुन्दर..

आभार

Patali-The-Village said...

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है|धन्यवाद|

DR.ASHOK KUMAR said...

बहुत खूबसूरत गजल........... प्रत्येक शेर मेँ बेशकीमती भाव कलमबद्ध किया है आपने ।

आपको एवं आपके परिवार को मकर संक्रान्ति की शुभकामनायेँ

"गजल............ आईँ थी जब सामने मेरे तुम"

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बेहतरीन रचना ..... आइना है
आज के सामाजिक और व्यावहारिक पक्ष का

Shabad shabad said...

बहुत ही गहरी बात कही है आपने !

होड लगी है बस दौलत की
होती मारा मारी रामा......

बिल्कुल सही कहा है आपने ....

कर दिया है
दौलत की दौड़ में
खुदा लापता !

आभार

हरदीप

Chaitanyaa Sharma said...

सक्रांति ...लोहड़ी और पोंगल....हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें......सादर

सुज्ञ said...

कर दिया है
दौलत की दौड़ में
खुदा लापता !……………यही होता है।
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उतरायाण: मकर सक्रांति, लोहड़ी, और पोंगल पर बधाई, धान्य समृद्धि की शुभकामनाएँ॥
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DR. ANWER JAMAL said...

Nice post .

विनोद कुमार पांडेय said...

शब्द,भाव,लय हर तरीके से दुरुस्त एक बेहतरीन ग़ज़ल...बहुत बहुत बधाई..प्रणाम माता जी

सहज साहित्य said...

निर्मला जी , बहुत करारा व्यंग्य है ।

स्वप्निल तिवारी said...

duniyaa kee bahut saari visangatiyon par comment karti hui rachna hai ...bahut acchi lagi

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