30 December, 2008


मुझे अपने दिल के करीब रहने दो
न पोंछो आँख मेरी अश्क बहने दो
ये इम्तिहां मेरा है जवाब् भी मेरा होगा
दिल का मामला है खुद से कहने दो
जीते चले गये ,जिन्दगी को जाना नहीं
मुझे मेरे कसूर की सजा सहने दो
उनकी जफा पर मेरी वफा कहती है
खुदगर्ज चेहरों पे अब नकाब रहने दो
तकरार से कभी फासले नहीं मिटते
घर की बात है घर में रहने दो !!

5 comments:

Dr Parveen Chopra said...

बहुत खूब !!

विवेक सिंह said...

"तकरार से कभी फासले नहीं मिटते"

बहुत खूब !

dpkraj said...

ये इम्तिहां मेरा है जवाब् भी मेरा होगा
दिल का मामला है खुद से कहने दो
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आपकी गजल अच्छी लगी
दीपक भारतदीप

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar said...

Respected Nirmala ji,
Bahut khoobsoorat gajal ...meree badhai sveekar karen.
Hemant Kumar

Unknown said...

कमाल की बात कह दी आपने तो माता जी।

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